Gurugram में एक ट्रैक पर दो ट्रेने दौड़ाने की तैयारी, Faridabad रूट पर मिलेंगे दोनों विकल्प, HMRTC का बड़ा प्रस्ताव
मेरठ मॉडल की तर्ज पर HMRTC ने NCRTC को भेजी सिफारिश; ₹15,745 करोड़ के प्रोजेक्ट में कम दूरी के यात्रियों को मिलेगी बड़ी राहत

Gurugram: एनसीआर के तीन प्रमुख शहरों में शामिल गुरुग्राम, फरीदाबाद और ग्रेटर नोए के बीच सफर करने वाले लाखों यात्रियों के लिए एक शानदार खबर है। हरियाणा मास रैपिड ट्रांसपोर्ट कार्पोरेशन (HMRTC) ने इस रूट पर प्रस्तावित नमो भारत ट्रेन (RRTS) के ट्रैक पर ही मेट्रो चलाने का प्रस्ताव तैयार किया है। मेरठ-दिल्ली आरआरटीएस कॉरिडोर की तर्ज पर दी गई इस सिफारिश का उद्देश्य छोटी दूरी के यात्रियों को सस्ता और सुलभ विकल्प देना है।
HMRTC का ‘स्मार्ट’ प्रस्ताव?
HMRTC के प्रबंध निदेशक डॉ. चंद्रशेखर खरे ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC) को सुझाव दिया है कि करीब 61 किलोमीटर लंबे इस कॉरिडोर पर बुनियादी ढांचा (ट्रैक) एक ही रहे, लेकिन उस पर दो तरह की सेवाएं उपलब्ध हों। इसमें नमो भारत को लेकर लंबी दूरी और तेज गति और मेट्रो के लिए हर 1.5 से 2 किलोमीटर पर ठहराव के साथ स्थानीय यात्रियों की व्यवस्था हो।
डॉ. खरे के अनुसार यदि कोई यात्री इफको चौक से फरीदाबाद के बीच किसी नजदीकी स्टेशन पर जाना चाहता है, तो मेट्रो उसके लिए सबसे सटीक विकल्प होगी। इससे एक ही प्रोजेक्ट की लागत में दो परिवहन सेवाओं का लाभ मिल सकेगा।
मेट्रो का जाल इस परियोजना की अनुमानित लागत ₹15,745 करोड़ है। अधिकारियों का तर्क है कि गुरुग्राम के इफको चौक से गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड तक का 8 किमी का हिस्सा मेट्रो के लिए भी महत्वपूर्ण है। यदि नमो भारत के ट्रैक पर ही मेट्रो चलती है, तो अलग से मेट्रो रूट बनाने का भारी-भरकम खर्च बचेगा।

यह रूट गुरुग्राम में दो प्रमुख मेट्रो लाइनों को जोड़ेगा:
रैपिड मेट्रो: गोल्फ कोर्स रोड पर।
प्रस्तावित मेट्रो: गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड से सेक्टर-5 तक।
6 स्टेशनों से बदलेगी एनसीआर की तस्वीर मौजूदा योजना के तहत इस 61 किमी लंबे रूट पर 6 मुख्य स्टेशन प्रस्तावित हैं।
गुरुग्राम: इफको चौक और सेक्टर-54
फरीदाबाद: बाटा चौक और सेक्टर-85-86 चौक।
नोएडा/ग्रेनो: सेक्टर-142-168 और सूरजपुर।
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी इस हाइब्रिड मॉडल का समर्थन किया है। मई 2025 में हुई उच्च स्तरीय बैठक में उन्होंने दिल्ली-बावल रूट पर भी इसी तरह की व्यवस्था की वकालत की थी, ताकि लंबी और छोटी दूरी के यात्रियों के बीच संतुलन बना रहे।













